रेवांचल टाईम्स–स्वच्छता सर्वेक्षण में सिवनी नगर पालिका संभाग में प्रथम प्रदेश में तीसरे और ऑल इंडिया में 53 वा स्थान प्राप्त किया साथ ही प्रेरक सम्मान में गोल्ड प्राप्त किया ।
मगर ना जाने क्यो सिवनी के हाल देखते हुए नगर पालिका क्षेत्र के नागरिक ये ही सोच रहे है। की ये सर्वे टीम कौन सी सिवनी का सर्वे कर चली गई जो इन्हें सिवनी की गंदगी नहीं दिखी और हमे दिखाई देती है।
आम जनता पर जनचर्चा व्याप्त है की पंडित जी को हाथ देखने से फुर्सत मिलती तो साहब सिवनी की गलियों में पड़ी गंदगी, महकती नालिया, आवारा कुत्ते, रोड में घूमती आवारा गाय, सुअर की तो बात ही नही कर सकते, शहर का अतिक्रमण, सिवनी से खत्म होती नालिया अतिक्रमण से, मनचाहे खड़े होते वाहन, शहर के तालाबों में जमा होती गंदगी, टूटी नाली, दुकानदारों का रोड में अतिक्रमण , टूटी सड़क ,लोगों की समस्याओं के आवेदन आदि के ओर ध्यान दे पाते।
कल ही जब शहर में निकले तो अवार्ड विजेता शहर के हाल नजर आ गए। नेता,सामाजिक कार्यकर्ता, पत्रकार, कर्मचारी, अधिकारी कभी शहर की गलियों में निकल कर देखे और यदि इसमें सुधार हो जाए तो शायद सिवनी की रेटिंग को और अच्छा किया जा सकता है। और गंदगी से होने वाली बीमारियों से शहरवासियों को बचाया जा सकता है वैसे भी शहर डेंगू, मलेरिया जैसी समस्या से जूझ रहा है।
विधायक, सांसद को भी शहर की दुर्दशा नजर नहीं आना समझ से परे है।
जबकि नगर पालिका के पास महंती अमले की कमी नहीं है।अभी झाड़ू और कचरा गाड़ी से रैंक यहां तक पहुंच गई यदि और कामों पर नगर पालिका अधिकारी और नेताओं का ध्यान हों जाए तो रैंक बड़ सकती हैं।
अखिल बन्देवार एंव विनोद दुबे के साथ रेवांचल टाईम्स की रिपोर्ट.....
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